हेनरी डेविड थोरो ने अपना लगभग पूरा जीवन मैसाचुसेट्स के कॉनकॉर्ड में बिताया। 1845 में उन्होंने वॉल्डन तालाब के किनारे एक छोटी कुटिया बनाई और वहाँ दो वर्ष, दो महीने और दो दिन रहे — सोच-समझकर जीने का यह प्रयोग आगे चलकर Walden (1854) बना, जो अमेरिकी साहित्य की सबसे ध्यान से पढ़ी गई पुस्तकों में है।
वे पेशे से भूमि-सर्वेक्षक भी थे, दास-प्रथा के विरोधी, और नागरिक अवज्ञा पर उस निबंध के लेखक जिसने बाद में गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर को प्रभावित किया। चौथाई सदी तक रखी गई उनकी डायरियाँ सामान्य दिनों पर सूक्ष्म ध्यान के लगभग बीस लाख शब्दों तक फैली हैं।
RiseHush में थोरो की हर पंक्ति Walden या उनके सत्यापित प्रकाशित लेखन से ली गई है।